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About RMASS

About Rashtriya Manav Adhikar Suraksha Sangh

(1) भारत का संविधान जिसे स्वतन्त्रता के पश्चात् तत्काल तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे समाज की स्थापना करना था जो विधि संगत हो तथा मानव के हित में हो। जिसके अन्तर्गत समस्त देशवासियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर, शान्ति और सुरक्षा के वातावरण में गरिमामयी माहौल मे जीने का अधिकार मिल सके।

(2) राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संघ की स्थापना प्रायः समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के साथ-साथ भारतीय संविधान में प्रदत्त सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, एवम् आर्थिक उत्थान के लिए प्रयास करना है। समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियाँ जेसे दहेज हत्या, बालविवाह, अविवाहिता, बालश्रम, नशा, घूम्रपान, आपसी साजिश, बाल वैश्यावृत्ति को रोकने के लिए एवं स्वास्थय चिकित्सा, कुपोषण, बच्चों, दलितों, महिलाओं एवम् शोषित वर्गों के अधिकार की रक्षा के लिए यह संस्था प्रभावशाली एवं कानूनी प्रयास करेगी।

मानवअधिकार के घोषणा-पत्र

  • हर मनुष्य को जीवन यापन करने, स्वतन्त्र रहने और अपनी रक्षा करने का अधिकार है।
  • कोई मनुष्य किसी का दास नहीं है।
  • किसी व्यक्ति को प्रताड़ित करना या उससे क्रुरतापूर्वक व्यवहार करना उसके मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
  • किसी भी व्यक्ति को बगैर किसी कारण गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।
  • सभी को अपने राज्य की सीमाओं के भीतर आवास बनवाने या अन्यत्र जाने का अधिकार है।
  • सभी को विदेश जाने या लौटकर अपने देश आने का अधिकार है।
  • किसी भी व्यक्ति के साथ मनमानीपूर्वक खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।
  • प्रत्येक व्यक्ति को न्यायालय की शरण में जाने का अधिकार है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को न्यायालय की शरण में जाने का अधिकार है
  • प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्रीयता का अधिकार है। किसी को भी उसकी राष्ट्रीयता से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • हर महिला के मातृत्व के अधिकार की रक्षा जरूरी है, चाहे उसके सन्तान की उत्पत्ति विवाह सम्बन्धों से हुई हो या नहीं।
  • सभी को सम्पत्ति रखने का हक है, किसी को उसकी सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • सभी को काम और आराम करने का अधिकार है।
  • सभी को निजि विचार और धार्मिक आस्था की स्वतन्त्रता है।
  • •सभी को अपने देश की सरकार में सहभागिता करने का अधिकार है।

RMASS के कार्यप्रणाली€

दहेज हत्या, बाल विवाह, बालश्रम, बाल वैश्यावृत्ति, भुखमरी, महिला उत्पीड़न, दूसरी शादी, साम्प्रदायिक हिंसा, श्रमिक शोषण, बलात्कार, कैदियों का उत्पीड़न, झूठे मामले, गैर-कानूनी कार्य, पुलिस प्रताड़ना, पुलिस कार्य में विफलता, एफ.आई.आर. दर्ज नहीं करना, फर्जी मुठभेड़, लोक-प्राधिकारी द्वारा कार्यों में बेईमानी, असुसूचित जाति एवम् जनजाति के विरूद्ध अत्याचार, पुलिस हिरासत में मृत्यु, सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार, मौलिक अधिकारों का हनन आदि इस सम्बन्ध में कोई भी सूचना मिलने पर मानव अधिकार सुरक्षा संक्ष पीड़ित व्यक्ति के उपचार के लिए तत्पर है तथा पीड़ित अथवा पीड़िता को न्यायिक उपचार व क्षतिपूर्ति दिलाना ही हमारी प्राथमिकता में सर्वोच्च है।