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Welcome to Rashtriya Manav Adhikar Suraksha Sangh

मानवाधिकार की सर्वभौमिकता

मानवाधिकार की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में सार्वभौमिक मानवाध्किर घोषणा स्वीकार की थी और सन् 1950 में महासभा ने सभी देशों को इसके लिए आमंत्रित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को मानवाधिकारों की सभा और उसे बढ़ावा देने के लिए तय किया, लेकिन हमारे देश में मानवाधिकार कानून को अमल में लाने के लिए काफी लम्बा समय लगा। भारत में 26 सितम्बर 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में लाया गया है। हमारे संविधान के भाग-3 (अनु. 12 से 35) मूल अधिकारों की घोषणा करता है। और भाग 4 (अनु.36 से 51) राज्य के निति निर्देश तत्वों का वर्णन करता है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन राष्ट्रपति के एक अध्यादेश द्वारा 1993 में किये जाने के एक वर्ष के बाद ही वर्ष 1994 में एक अधिनियम पारित कर राज्यों में मानवाधिकार आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया। यह आयोग मानवाधिकारों के हनन और उल्लंघन के मामलों की जाँच स्वयं या किसी के द्वारा शिकायत किये जाने पर करता है।

मानवाधिकार दिवस

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 10 दिसम्बर 1948 को सार्वभौमिक पंत को स्वीकृति और घोषित किया गया। तभी से 10 दिसम्बर को ही सम्पूर्ण विश्व में मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासंघ ने मानवाधिकारों को चार रूपों में (सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक) में प्रस्तुत किया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार सम्बन्धी विधेयक में समानता, शिक्षा, धर्म, सामाजिक सुरक्षा, मानव व्यवहार, नयाय, आत्मनिर्णय का अधिकार, धर्मान्तरण और आर्थिक एवं सांस्कृतिक उन्नति के अधिकार सम्मिलित है। बाद में इसमें बच्चों को सम्मिलित किया गया है।

ABOUT RMASS

(1) भारत का संविधान जिसे स्वतन्त्रता के पश्चात् तत्काल तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य एक ऐसे समाज की स्थापना करना था जो विधि संगत हो तथा मानव के हित में हो। जिसके अन्तर्गत समस्त देशवासियों को बिना किसी भेदभाव के समान अवसर, शान्ति और सुरक्षा के वातावरण में गरिमामयी माहौल मे जीने का अधिकार मिल सके।

(2) राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संघ की स्थापना प्रायः समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने के साथ-साथ भारतीय संविधान में प्रदत्त सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक, एवम् आर्थिक उत्थान के लिए प्रयास करना है। समाज में व्याप्त अनेक कुरीतियाँ जेसे दहेज हत्या, बालविवाह, अविवाहिता, बालश्रम, नशा, घूम्रपान, आपसी साजिश, बाल वैश्यावृत्ति को रोकने के लिए एवं स्वास्थय चिकित्सा, कुपोषण, बच्चों, दलितों, महिलाओं एवम् शोषित वर्गों के अधिकार की रक्षा के लिए यह संस्था प्रभावशाली एवं कानूनी प्रयास करेगी।

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MANVAADHIKAR KNOWLEDGEMENT

भारत में मानवाधिकारों सम्बन्धी घटनाओं के कालक्रम

  • 1829 - पति के मृत्यु के बाद रुढिवादी हिन्दू दाह संस्कार के समय उसकी विधवा के आत्म दाह की चली आ रही सती प्रथा को राजा राम मोहन राय द्वारा चलाये गये हिन्दू सुधार आन्दोलन के वर्षो प्रचार के बाद गवर्नर जनरल विलियम बेंटिक ने औपचारिक रुप से समाप्त कर दिया।
  • 1929 - नाबालिगों को शादी से बचाने के लिए बाल विवाह निरोधक कानून पास हुआ।
  • 1947 - ब्रिटिश राज की गुलामी से भारतीय जनता को आजादी मिली।
  • 1950 - भारत के संविधान ने सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के साथ सम्प्रभुता सम्पन्न लोकतान्त्रिक गणराज्य की स्थापना की।
  • 1955 - भारतीय हिन्दू परिवार कानून में सुधार, हिन्दू महिलाओं को मिले और अधिकार।
  • 1958 - सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम 1958 पारित हुआ।
  • 1973 - भारत के केशवानन्द भारती वाद में, उच्चतम न्यायालय ने निर्धारित किया कि संविधान संशोधन द्वारा संविधान के मूलभूत ढाँचे में परिवर्तन नहीं किया जा सकता (जिसमें संविधान द्वारा कई मूल अधिकार भी शामिल है)
  • 1975-77 - भारत में आपातकाल की स्थिति-अधिकारों के व्यापक उलंघन की घटनाएं घटी।
  • 1978 - मेनका गाँधी वनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह कानून लागु किया कि आपात-स्थिति में भी अनुच्छेद 21 के तहत जीवन (जीने) के अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता।
  • 1978 - जम्मू और कश्मीर जन सुरक्षा अधिनियम, 1978 आया।
  • 1984 - आपरेशन ब्लू स्टार और उसके तत्काल बाद सिख विरोधी दंगे।
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